UP News : Modinagar : नगर पालिका की करोड़ों की जमीन भू माफियाओं के कब्जे में, क्षेत्र के आला अधिकारी बेखबर

 

गाजियाबाद क्षेत्र के मोदीनगर में करोड़ों की जमीन भू माफियाओं के द्वारा कब्जआई हुई है लेकिन अधिकारियों से जब इसकी बात करी तो उन्होंने इस बात पर अपनी बेखबरी का साफ जाहिर की बताते चले शासन द्वारा मुख्यमंत्री एंटी भू-माफिया अभियान के अन्तर्गत वर्ष 2017 के माह मई, जून में मुख्यमंत्री एंटी भू-माफिया अभियान के अन्तर्गत राजस्व से संर्दभित लगभग सौ से अधिक भू-माफियों को चिन्हित किए जाने के मामले में नगर पालिका अधिकारियों ने जमकर घोलमाल किया है। जिसकी जांच की जा रही है। जब इस बात के बारे में उप जिला अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने भी इस बात से दरकिनारा कर दिया

बताते चले कि वर्षों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने सरकार की करोडों कीमत की भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ था। जैसे ही भाजपा सरकार सत्ता में आई तो उसने मुख्यमंत्री एंटी भू-माफिया अभियान के अन्तर्गत ऐसे अवैध कब्जाधारियों की सूची पालिका के माध्यम से पोर्टल पर दर्ज कराये जाने व अवैध कब्जाधारियों के विरूद्व कार्रवाही के निर्देंश दिए गये। जिसमे तकरीबन 100 से अधिक अवैध कब्जाधारियों की सर्वें रिपोर्ट में पालिका द्वारा जमकर हेराफेरी की बात सामने आई एव चिन्हित किए गये भू-माफियों के कब्जे से अवैध कब्जे हटायें जाने व जुर्माना आदि वसूलने के नाम पर कई के विरूद्व न्यायालय में मुकदमें पंजीकृत किए गये तो कई को राहत दी गई। परंतु इन मुकदमों की पत्रावलियों को सुनवाई हेतु उपश्रमायुक्त गाजियाबाद के कार्यालय भेज दिया गया था। इनमें करीब 56 मुकदमों की पत्रावलियां ऐसे भी थी, जो मोदीनगर परगना मजिस्ट्रेट के न्यायालय में लंबित थी। कुल मुकदमें लगभग 150 थे। शासन के निर्देंश पर दिनांक 26 जून 2018 को उपश्रमायुक्त गाजियाबाद के कार्यालय ने करीब 56 पत्रावलियों को परगना मजिस्ट्रेट के न्यायालय सुनवाई हेतु वापस भेजा गया था। परंतु चिन्हित किए गये भू-माफियों को लाभ पंहुचायें जाने की मंशा से कोई कार्यवाही नही की। भ्रष्टाचार व लापरवाही के कारण जिससे सरकार को राजस्व का करोडों का नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। इस मामले का खुलासा होने पर 8 जून को पालिका अधिशासी अधिकारी शिवराज सिंह द्वारा उपश्रमायुक्त को सभी पत्रावलियां वापस भेजे जाने को पत्र लिखा गया है। इस संबन्ध में अधिशासी अधिकारी शिवराज सिंह से जब बात की गई तो उन्होंने मामला संज्ञान में न होने व हाल ही में पत्रावली वापस मंगाये जाने के लिए पत्राचार किए जाने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। आलाधिकारियों का कहना है कि मामला घोर भ्रष्टाचार व लापरवाही से जुड़ा है। जांच की जा रही है। लापरवाही पर विभागीय कार्रवाही की जायेंगी।

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