UP News : Modinagar : चौधरी चरण सिंह जी सदैव किसानों व कामगारों और कमेरों के हक की लड़ाई लडते रहे – चौधरण अंजली आर्या

 

आज गाँव रोरी मे चौधरी चरण सिंह जी की 33 वी पुण्यतिथि यज्ञ हवन व चौधरी चरण सिंह जी के चित्र पर दिया जला कर व फूल माला अर्पण कर मनाई गई। यज्ञ उपरांत महिला जाट समाज मोदीनगर की अध्यक्ष चौधरण अंजली आर्या ने अपने उदबोधन मे चौधरी चरण सिंह जी से जुड़ी हुई जानकारी देते हुए कहा कि चौधरी चरण सिंह का जन्म जाट परिवार में 23 दिसम्बर सन 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में चौधरी मीर सिंह के परिवार में हुआ था। इनके पिता किसान थे। इनके परिवार का संबंध 1857 की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले राजा नाहर सिंह से था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा नूरपुर ग्राम में ही हुई एवम मेट्रिक इन्होने मेरठ के सरकारी उच्च विद्यालय से किया। 1923 में यह विज्ञान के स्नातक हुए, दो वर्षों के बाद 1925 में कला स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की, इसके पश्चात वकील की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मेरठ में वकालत का कार्यभार सम्भाला। इनका विवाह गायत्री देवी से हुआ। 1929 में चरण सिंह ने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में प्रवेश किया, सर्वप्रथम  इन्होने गाजियावाद में काँग्रेस का गठन किया। 1930 में गांधीजी द्वारा चलाये गये “सविनय अवज्ञा आन्दोलन” में नमक कानून तोड़ने का आहवान किया, चरण सिंह ने गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिंडन नदी पर नमक बनाया था 1940 के सत्याग्रह आन्दोलन में भी यह जेल गए उसके बाद 1941 में बाहर आये ! आजादी के बाद, चरण सिंह 1952 में, उत्तरप्रदेश के राजस्व मंत्री बने एवम किसानों के हित में कार्य करते रहे, इन्होने 1952 में “जमींदारी उन्मूलन विधेयक ” पारित किया। इस विधेयक के कारण 27000 पटवारियों ने त्याग पत्र दे दिया ! जिसे इन्होने निडरता के साथ स्वीकार किया एवम किसानों को पटवारी के आतंकी वातावरण से आजाद किया। चरण सिंह व जवाहर लाल नेहरु के विचारो एवम कार्यप्रणाली में काफी मतभेद था। जिसके चलते  इन दोनों में कई बार टकराव हुए, चरण सिंह नेहरु की आर्थिक नीती के आलोचक थे। चरण सिंह ने इस मतभेद के चलते 1967 में काँग्रेस पार्टी को छोड़ दिया और  राज नारायण एवम राम मनोहर लोहिया के साथ नयी पार्टी का गठन किया, जिसका चिन्ह ‘हलदार’ था। इसके बाद कई काँग्रेस विरोधी नेताओं को 1970  एवम 1975 में जेल में बन्द किया गया व 1977 मे एमरजैंसी लगा कर सभी विपक्षियों को प्रताड़ित किया गया। मोरारजी देसाई जी के कार्यकाल में चरण सिंह  “उप-प्रधानमंत्री” एवम “गृहमंत्री रहे। इसी शासन के दौरान चरण सिंह और मोरार जी देसाई के  बीच मतभेद बढ़ गये थे। इसके बाद चरण सिंह ने बगावत कर दी व जनता दल पार्टी छोड़ दी, जिससे मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई। कांग्रेस व दूसरी पार्टी के समर्थन से चरण सिंह ने 28 जुलाई 1979  को प्रधानमंत्री पद को संभाला। इस समय इन्हें  इन्दिरा गाँधी जैसे दिग्गज नेता बहुत समर्थन दिया. समाजवादी पार्टी और काँग्रेस ने एक साथ समझौता कर शासन किया, पर कुछ वक्त बाद मतभेद होने पर कांग्रेस पार्टी ने समर्थन वापस ले लिया जिस कारण चौधरी साहब ने 14 जनवरी 1980 ने त्याग पत्र दे दिया।

बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा चरण सिंह किसानों के लिए एक देवता की तरह थे। इन्होने पुरे उत्तर प्रदेश के किसानों से मिल कर उनकी समस्या का निदान किया। भारत की भूमि हमेंशा से कृषि प्रधान रही है। कृषकों के प्रति प्रेम ने चरण सिंह को इतना सम्मान दिया की इन्हें कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा। इनका जीवन सादगी पूर्ण एवम सिधांतवादी रहा। 29 मई 1987 को इनका निधन हो गया यह खबर सुनते ही पूरा देश शोक मे डूब गया था। इस अवसर पर चौधरी गंगाराम, नीरज पंवार, सरोज देवी, रीता चौधरी, आर्यन आदि उपस्थित रहे।

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