UP News : Mathura : योगी सरकार की दावों हवा निकालने बैठे हैं उनके अफसर और दिग्गज भाजपाई केंद्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के दर्जा प्राप्त मंत्री राजनीतिक संरक्षण के कारण नहीं हो पा रही है रिसीवर के खिलाफ कार्रवाई

 

गोवर्धन : योगी सरकार भले ही कितने ही दावा करती हो कि उनके शासन काल मे भयमुक्त अपराध मुक्त समाज की स्थापना कि जा रही हो लेकिन सच्चाई इससे इतर है राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान योगी सरकार को विशेष जांच दल से जांच करने को आदेशित किया गया था जिस पर मथुरा जनपद के कस्बा गोवर्धन स्थित मुकुट मुखारबिंद मन्दिर दसवीसा ब्राह्मणन के रिसीबर रमाकांत गोस्वामी के विरूद्ध शासन ने एसआईटी के द्वारा अगस्त 2019 में जांच प्रारंभ की गई थी।

उक्त जांच अधिकारी वी पी सिंह से उनके मोबाईल नम्बर पर वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि जांच पूर्ण हो चुकी है व जांच आख्या प्रमुख सचिव गृह विभाग में है और आगे उनके आदेश की प्रतीक्षा में है तो वहीं दूसरी ओर सूत्रों के अनुसार किसी दिग्गज भाजपाई नेता ने उक्त रिसीबर रमाकांत गोस्वामी को बचाने हेतू अच्छी खासी रकम में सौदा कर फाइल की आगे की कार्यवाही को रुकवाने का पूर्ण आश्वासन रिसीबर को दे रखा है ।

सूत्रों की खबर पर विश्वास करने के लिए यह काफी होगा कि आये दिन रिसीबर के द्वारा किये गए करोड़ों रुपये के घोटाले को स्थानीय मीडिया लगातार जोर शोर से उठा रही है तो दूसरी तरफ शोशल मीडिया पर भी रिसीबर के कारनामें प्रमुखता से चल रहे हैं जिसकी जानकारी रिसीबर के कारनामों की जांच कर रहे विशेष अनुसन्धान दल के जांच अधिकारी वीपी सिंह से लेकर तमाम उच्च अधिकारियों तक को है फिर भी उक्त जांच का लंबित होना स्पष्ट दर्शाता है कि योगी सरकार कितनी भी ईमानदारी से कार्य करने अपराध मुक्त सरकार होने का दावा करती हो लेकिन उनके अधिकारी और चन्द भाजपाई अपने निजी स्वार्थों के चलते सरकार की फजीहत कराने से बाज नही आ रहे।

क्या है रमाकांत गोस्वामी प्रकरण

जनपद मथुरा के कस्बा गोवर्धन के दो प्रमुख मंदिरों के प्रबंध व्यवस्था सम्भालने के लिये दानघाटी मन्दिर पर सहायक प्रबन्धक डालचंद चौधरी व मुकुट मुखारबिंद मन्दिर दसबिसा पर रिसीबर रमाकांत गोस्वामी तैनात हुए थे लेकिन दानघाटी मंदिर जिसके प्रबन्धक डालचंद चौधरी थे जो करोडों रुपयों के गबन के आरोपी हैं जो फिलहाल उस गबन के आरोप में मथुरा कारागार में बंद हैं तो दूसरी तरफ दूसरे प्रमुख मंदिर के रिसीबर हैं रमाकांत गोस्वामी जिनके ऊपर डालचंद चौधरी से भी कई गुना ज्यादा करोड़ों रुपये के गवन के आरोप हैं। जिनकी पुष्टि तत्कालीन उपजिलाधिकारी गोवर्धन नागेन्द्र सिंह ने जब इनकी जांच की तो दोषी पाया।

दरअसल रिसीबर की नियुक्ति के समय से ही इनको यह निर्देशित किया गया था कि पचास हजार रुपये से ऊपर की धनराशि विना कोर्ट के आदेश के रिसीबर खर्च नही कर सकते हैं और रिसीबर के अनुसार मन्दिर की वार्षिक आय पांच से दस करोड़ रुपये प्रति वर्ष है जिस हिसाब से मंदिर खाते में कम से कम पचास करोड़ रुपये होने चाहिये जो कि नही है मंदिरों के होने वाले ठेका रजिस्टरों के अनुसार भी जो रकम जमा होनी चाहिये बैंक स्टेटमेंट के अनुसार उतनी रकम भी जमा नही है अपितु बैंक स्टेटमेंट के अनुसार ठेकेदारों को रिसीबर रमाकांत गोस्वामी के द्वारा एक ही दिन में पचास पचास हजार के कई कई चैक दिए गए जो बैंक से क्लियर तो हुए लेकिन दस पन्द्रह मिंट बाद ठेकेदार ने वापिस मन्दिर खाते में जमा करा दीये और रिसीबर ने सेवायतों के सामने पूरे पैसे जमा कराने की वात बोलकर न सिर्फ ठेकेदारों को बचाया अपितु मन्दिर के कोष को नुकसान पहुँचाया। स्थिति सामने तब आयी कि जब जिन लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत नाजुक हुआ करती थी अब उन लोगों के पास तमाम सुख सुविधाओं के अलावा लग्जरी कारों के स्वामी है अचानक हुए परिवर्तन से लोगों का कोतुहल मचा और जब जानकारी हुई तो बेहद चौकानें वाली थी तभी से रिसीबर के विरुद्ध शिकायतों की लम्बी फेहरिस्त बनती चली गई।

समय रहते कार्यवाही नही हुई तो कभी भी हो सकती है कोई बड़ी अनहोनी

सूत्र वतातें हैं कि जिन लोगों के साथ मिलकर रिसीबर ने महाघोटाले को अंजाम दिया और मालामाल वनाया अब उन लोगों को आगे करके रिसीबर ने उन लोगों पर दबाब बनाने की जिम्मेदारी दी है जो रिसीबर कि शिकायतें कर रहे हैं या पैरवी कर रहे हैं जिससे दोनों तरफ आक्रोश व्याप्त है शिकायत कर्ता पक्ष ने जान माल खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की भी पुलिस के उच्चाधिकारियों मांग की है अंदर ही अंदर जो आक्रोश फैल गया है कहीं परिणाम खतरनाक साबित न हो।

क्या कहते हैं सेवायत लोग

उक्त रिसीबर के कृत्य के सम्बंध में भोला शर्मा , हरिबाबू शर्मा, जगदीश गोकुलिया, राधारमण शर्मा की जुबानी उनके अनुसार आखिर गबन और भृष्टाचार के आरोप सिद्द होने के उपरांत वो कौन बड़ा चेहरा है जो रमाकांत गोस्वामी को बचा रहा है

गोवर्धन जनपद मथुरा के कस्बा गोवर्धन के विश्व प्रसिद्ध मुकुट मुखारबिंद मंदिर दसबिसा ब्राह्मणं के रिसीबर रमाकांत गोस्वामी के विरूद्ध भृष्टाचार और गबन के आरोपों की शिकायतों का सिलसिला विगत कई वर्षों से चल रहा था पहले तो लम्बे समय तक शिकायतों पर संज्ञान ही नही लिया जाता रहा लेकिन जब जब शिकायतों का क्रम बन्द नही हुआ तो तत्कालीन एसडीएम गोवर्धन नागेंद्र सिंह के द्वारा जांच की गई तो जांच आख्या में रमाकांत गोस्वामी को करोड़ों रुपये के भृष्टाचार और गबन में दोषी पाया गया ।

जांच आख्या विधिक कार्यवाही की संतुति के साथ जिलाधिकारी मथुरा के माध्यम से जिला न्यायालय को प्रेषित कर दी गई लेकिन वहां पर बिधिक कार्यवाही की बात तो बहुत दूर की रही संज्ञान भी नही लिया गया अपितु पीठासीन अधिकारी के द्वारा जांच आख्या को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और शुरू हुए रिसीबर रमाकांत गोस्वामी को बचाये जाने के प्रयास ।

यहां यह गौर करने वाली रमाकांत गोस्वामी उक्त मन्दिर का रिसीबर पद पर कोर्ट के आदेश से आसीन हैं और उनके द्वारा संपादित प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता का ध्यान रखना पीठासीन अधिकारी का भी उतना ही दायित्व बनता है जितना रमाकांत गोस्वामी का बनता है उसके बाबजूद भी विगत कई वर्षों से भृष्टाचार और गवन का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा जिससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि कहिं न कहि दूसरे प्रमुख मन्दिर पर भी गबन और भृष्टाचार उसके मैनेजर डालचंद चौधरी के द्वारा किया गया वहां भी घोटाला न्यायिक अधिकारियों के संरक्षण में हुआ था और उसे बचाने हेतू हर सम्भव प्रयास भी किये गए परन्तु जब मामला ज्यादा तूल पकड़ने लगा तो आनन फानन में पीठासीन अधिकारी के द्वारा डालचंद चौधरी के विरुद्ध थाने में मुकदमा दर्ज करने हेतू आदेश जारी किए गए और डालचंद चौधरी विगत एक वर्ष से मथुरा जेल में निरुद्ध हैं परन्तु एक जैसे मामले होने के उपरांत भी कार्यवाही में अंतर और भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया जाना कहिं न कहिं न्यायिक अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह अवश्य खड़े करते हैं।

 

डॉक्टर केशव आचार्य गोस्वामी

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