UP News : Mathura : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध गहवर वन को राधा रानी वन्य जीव जंतु विहार घोषित करने के प्रयास शुरू हुए

 

मानवता को बचाने के लिए प्रत्येक मानव को एक वृक्षा लगाकर बच्चे की तरह उसका पालन करना चाहिए बंशीधर अग्रवाल।

मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर, गहवर वन को सेंचुरी घोषित करने की मांग की है।

पृथ्वी मां का करो श्रंगार एक वृक्ष 10 पुत्र समान रक्षा आध्यात्मिक प्रकृतिपर्यावरणविद गुरुजी युवराज।

बरसाना (मथुरा) : पर्यावरणविद गहवर वन बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष बंशीधर अग्रवाल के अनुसार पुरातनपावन भूमि ब्रह्माजी की सृष्टि से अलग है क्योंकि लोक मान्यताओं के अनुसार इसका अस्तित्व शेषनाग के फन पर टिकी भूमि से अलग भगवान के निज धाम के स्वरूप में माना जाता है जो महाप्रलय में भी नाश नहीं होता भक्ति में लीन अनेक संत महात्मा ऋषि मुनि आज भी यहां लता- पता एवं वृक्षों के रूप में विद्यमान हैं, यहां वास करने पर लता- पताओ व वन्यजीवों के हाव-भावों से अनुमान होता है कि आज भी यहां प्राचीनता एवं प्राचीन जीवन मौजूद है गहवर वन गहरी वृक्षावली के कारण सूर्य व चंद्र की किरण भी नहीं पहुंच पाती एवं गाय चराने वाले गवालो को आज भी इन वनों में वंशी की धुन घुंघरूओ की आवाज सुनाई पड़ती है इस भूमि के दर्शन मात्र से भगवान की प्राप्ति हो जाती है गहवर वन रमणीक, मनमोहक व शान्तिमय वन ब्रज में है !यहां ढाक कदम, पीलू, मोदी हीस आदि के कृष्ण युगीन लाखो वृक्ष है इस वन में मोर ,नीलगाय, हिरण व खरगोशों सहित अन्य वन्य जीव मौजूद हैं।

पर्यावरणविद वंशीधर अग्रवाल का संदेश है कि जीवन में एक व्यक्ति कम से कम एक वृक्ष लगाकर उसे बच्चों की तरह पाले तो सौ पुत्रों के पुण्य के साथ ही संसार में कोई समस्या नहीं रहेगी 62 वर्षीय राधा आर्केड निवासी वंशीधर अग्रवाल ने दो देसी कदम तथा एक अशोक का पेड़ लगाकर रोजाना स्वयं पानी देकर उसे बच्चों की तरह पालन करते हुए बड़ा किया है।

आज से 49 वर्ष पूर्व इस वन को बचाने निकले पर्यावरणविद व गहवर वन बचाओ आंदोलन के प्रणेता बंशीधर अग्रवाल ने 24 वर्षों के संघर्ष के बाद 24 अक्टूबर 1997 को इसके साथ 6.845 हेक्टेयर भाग को आरक्षित वन तत्कालीन जिलाधिकारी श्री सदाकांत के सहयोग से कराया! तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक उत्तर प्रदेश डॉक्टर राम लखन सिंह ने 8 अक्टूबर 2003 में एक वन चौकी गहवर वन में बनायी गई थी! जिसे अब हटा दिया गया है बंशीधर अग्रवाल ने 11 जुलाई से 23 जुलाई 2000 आमरण अनशन किया था 8 अक्टूबर 2003 को तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री द्वारा इस गहवर वन को बचाने के लिए लखनऊ में वंशीधर अग्रवाल को सम्मानित किया।
श्री अग्रवाल ने ताजमहल से भी सुंदर यह गहवर वन को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित करने की मांग की है।

सेंचुरी घोषित कराने में विष्णु स्वामी संप्रदाय निर्मोही अखाड़ा खालसा पंथ श्री गोवर्धन पीठ के पीठाधीश्वर गुरुजी युवराज केसीजी ब्रज राजा ठाकुर जी संत रमेश बाबा, अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा, जाने-माने पर्यावरणविद अनिल प्रकाश जोशी, प्रोफेसर राजेंद्र सिंह मैग्सेसे पुरस्कृत, राधाकांत जी शास्त्री, राजीव गोयल, अभिषेक गर्ग केसेरे, राजीव अग्रवाल, विपिन अग्रवाल तथा विष्णु राजपूत आदि लगे हुए हैं।

 

डॉ केशव आचार्य गोस्वामी

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