UP News : Gonda : गोंडा कर्मों से बनती है खुद की पहचान : हरिकेश मौर्य

 

गोंडा : नई दिल्ली/गोरखपुर। हरकेश मौर्य ने मेहनत, लग्न, जज्बे एवं हौसले के माध्यम से अपनी एवं अपने मां-बाप की पहचान राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनाई। उन्होने ये माना कि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। यह मानना है हरकेश मौर्या का जिंदगी में कुछ भी नामुमकिन नहीं है। हम कठिन परिश्रम से अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

गोरखपुर के छोटे से ग्रामीण क्षेत्र चौरी-चौरा में रहने वाले हरिकेश मौर्या युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र एवं आदर्श बनते जा रहे हैं। आज का युवा खुद में हार मानकर हताश होकर जीवन में मेहनत करने के इरादों को छोड़कर गलत क्षेत्र में कार्य करने लगता है ऐसा ही उदाहरण हैं हरिकेश मौर्य। जिन्होंने जीवन में आने वाली परेशानियों को पार करते हुए खुद के सपनों को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत की और मेहनत रंग लाई। एक वक्त ऐसा था पिता श्री विश्व नाथ मौर्य ने जब उसे आर्थिक तंगी के कारण घर से निकाल दिया था तब ऐसा लग रहा था उसके जीवन और सपनों का अंत हो गया है। तभी अपने कठिन परिश्रम एवं आंखों में अपने सपनों को साकार करने के लिए जज्बे के साथ अनेकों रातों गन्ने के खेतों में सोकर शहर की ओर चल पड़ा। किस्मत में कुछ और ही लिखा था। कई दिनों तक होटल में काम करने के बाद मजदूरी करने के साथ-साथ जिंदगी में ऊंचाइयों को छूने एवं सपनों को साकार करने के लिए रातों में अपनी प्रैक्टिस जारी रख कर हरिकेश मौर्य एथलीट का एक ऐसा नाम है। जिसने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी 2009 में एथलीट कि क्षेत्र में उभरता हुआ होनहार खिलाड़ी जिसकी जिंदगी अनेकों परेशानियों के साथ गुजरी। मां-बाप दो भाई दो बहन होने के साथ सारी जिम्मेदारी बड़े होने के नाते हरिकेश मौर्या पर आ गई। हरिकेश सन् 2009 में पढ़ाई के क्षेत्र में आई0ए0एस0 ऑफिसर बनने का सपना लिए स्कूल जाना चाहता था। मगर पैसे ना होने के कारण वह सपना चकनाचूर सा हो गया। मगर खुद में हौसले हां कुछ करने का जुनून हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता है। एथलीट की दुनिया में कदम रखते ही दिलों पर राज करना और अपने कर्मों से खुद की पहचान बनाना उसे बखूबी आता था। 11 साल के कठोर परिश्रम ने उसे आज सितारा बना दिया। हरिकेश ने 2021 में ओलंपिक में अपने सपनों को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत करना शुरू कर दिया है। जी हां 2011 में 42 किलोमीटर नागपुर इंटरनेशनल प्रतियोगिता में 16 साल के हरिकेश मौर्य नंगे पैर प्रदेश में बहुत ही लाजवाब प्रदर्शन करते हुए लोगों के दिलों में एक अलग ही पहचान बना ली है। सन 2015 गुजरात में अपना हुनर दिखाने का एक बार फिर से अवसर प्राप्त हुआ। मगर जिंदगी में सपनों को साकार करने के लिए अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गुजरात में हुए अंतरराष्ट्रीय मैराथन में अभ्यास के लिए पूर्ण रूप से अच्छे गुरू अच्छा खाना अभ्यास के लिए अच्छे हैं। सामग्री का होना अति आवश्यक होता है। यह सब ना होने के कारण एक बार निराशा का सामना करना पड़ा। जिंदगी इतनी कठिनाइयों से गुजरने के बाद उन्होंने कभी हार ना मानी। इसे सबक के रूप में लेते हुए हर एक सफल व्यक्ति के पीछे असफलता की कहानी जरूर होती है। इस असफलता के बाद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। सन् 2016 में 10 किलोमीटर की प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल करके अपने हौसलों की उड़ान प्रदान की। लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई। सन् 2017 में आसाम में हुए 10 किलोमीटर की प्रतियोगिता में सफलता पाने के बाद 2017 में एक बार फिर से अपने हुनर का जज्बा दुनिया को दिखाने के लिए मेक्सिको में 10 किलोमीटर की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। दुनिया ने उन्हें काफी प्यार प्रदान किया। भूटान में हुए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 10वीं रैंक हासिल की। एक बार फिर से अपने सपनों को साकार करने के लिए 2017 में अमेरिका से विशेष ऑफर स्कॉलरशिप के रूप में प्रदान हुआ। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खुद को अनेकों वर्षों का सपना साकार करने का जज्बा अपनी आंखों में लिए सिल्वर मेडल प्राप्त किया और दुनिया को एक नया एथलीट का सुपरस्टार लोगों का आदर्श अपने कर्मों से बनाई। खुद की पहचान मां बाप का नाम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हुए जिंदगी जीने की राह आसान सी बना ली है। सन् 2021 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए अमेरिका में रहकर दिन रात मेहनत करके अपने सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत लगातार जारी है। ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना सपने को पूरा करने जैसा होगा। हरिकेश मौर्य ने बताया कि आप सभी का प्यार और आशीर्वाद तथा मां-बाप का प्यार आशीर्वाद यूं ही सदा मुझ पर बना रहा तो एक न एक दिन ये सपना जरूर पूरा होगा और आप सभी मेरे ताकत हो, मेरा हौसला हो, मेरा जज्बा हो आप सभी अपना प्यार और आशीर्वाद मुझ पर यूं ही बनाए रखना ताकि दुनिया के लिए कुछ कर सकूं देश के लिए कुछ कर सकूं।

हरिकेश अनेकों प्रकार से उन सभी जरूरतमंदों की मदद करते हैं जो देश के लिए और समाज के लिए मां-बाप के लिए खुद के लिए कुछ करना चाहते हैं। ईश्वर ने उन्हें उस योग्य बनाया कि आज हरिकेश मौर्या अनेकों असहाय व गरीबों की मदद करना भी नहीं भूलते हैं। हर दर्द को उन्होंने समझा है, जाना है और बारिकी से महसूस भी किया है। लोगों के दर्द को महसूस करते हुए सभी के मसीहा के रूप में भी विशेष योगदान प्रदान कर रहे हैं। हरिकेश आज युवाओं के लिए एक आदर्श के रूप में उभर कर सामने आये हैं और साथ ही साथ सभी युवा उनको अपना आदर्श मानते हुए उनके नियमों एवं नीतियों का पालन करते हैं और उनके द्वारा मिले विशेष रूप से आर्थिक मदद का सहारा उनके जीवन में आगे बढ़ने का सहारा सा बनता जा रहा है। युवा उन्हें कभी नहीं भूलते और उन्हें अपना आदर्श मानकर उन्हीं के पद चिन्हों पर चलना चाहते हैं और जीवन में अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। अपने मां-बाप का नाम रोशन करना चाहते हैं। हरिकेश मौर्य के आर्थिक मदद से कुछ लोग आई.ए.एस. ऑफिसर बनने का जो सपना देख रहे थे हरिकेश मौर्या के सहयोग से अपने सपनों को साकार कर पाए। हरिकेश मौर्य ने अनेकों की जिंदगी संवारी है।

अंत में एक बार पुन‘ हरिकेश मौर्य का कहना है कि जिंदगी में सभी के चेहरे पर खुशियां प्रदान कर जाऊं और अपने देश के लिए अपने देश के होनहार खिलाडि़यों के लिए कुछ कर जाऊं, अपने सपनों को साकार कर पाऊं देश के लिए इतिहास रच जाऊं। जज्बा है कुछ करने का।

 

शैलेन्द्र कुमार मिश्र

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