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दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में इन दिनों पड़ रही कड़ाके की ठंड कुछ लोगों के लिए जानलेवा बनती जा रही है। सर्दी बढ़ने के साथ नसों की सिकुड़न लोगों को परेशान कर रही है। गाजियाबाद में ही बीते एक सप्ताह में सात लोगों की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। लोग जब तक उन्हें सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे, तब तक उनकी सांसें उखड़ चुकी थीं। एक माह के दौरान 55 से ज्यादा लोगों को भर्ती करने की जरूरत पड़ी है।

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पिछले एक सप्ताह से तापमान 10 डिग्री से कम चल रहा है। ऐसे में सांस और हार्ट की समस्या से ग्रस्त मरीजों को दिक्कत हो रही है। अस्पताल में हर रोज दो से तीन मरीजों को हार्ट अटैक की परेशानी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो छह दिन में सात लोगों को हार्ट अटैक से मौत हुई है। इनमें बुजुर्ग लोगों की संख्या ज्यादा रही। जिले में 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर जयविंदर सिंह ने बताया कि अक्तूबर और नवंबर के अलावा दिसंबर में दिल संबंधी मरीजों को एंबुलेंस के जरिए घर से अस्पताल और अस्पताल से हायर सेंटर पहुंचने के केस ज्यादा मिले।

निजी अस्पतालों में भी मरीज बढ़े

शहर के निजी अस्पतालों में सर्दियों में दिल के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती है। सीनियर फिजिशियन डॉ. वीबी जिंदल ने बताया कि सर्दियों में उनके पास आने वाले दिल के मरीजों की संख्या में हर साल इजाफा होता है। सर्दियों में धमनियों की संकरा होने के कारण यह परेशानी बढ़ती है। इसलिए खास तौर पर दिल के मरीजों को सर्दी से बचना चाहिए। सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक सिंह बताते हैं कि गर्मियों में जितने मरीज उनके पास आए थे, सर्दियों में उससे कहीं ज्यादा मरीज आ रहे हैं। सर्दियों में दिल के रोगियों में 40 से 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। नए मरीजों में 35 से 40 आयु वर्ग के लोग हैं।

सावधानी बरतें

एमएमजी अस्पताल के फिजीशियन डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि पारा गिरने के साथ धुंध भी दिल के मरीजों के लिए खतरनाक है। जहरीले तत्व सांस लेने के साथ खून में मिल जाते हैं और रक्त को संक्रमित करते हैं, जिससे दिल संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है, जो लोग पहले से दिल की किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए तो यह मौसम और कॉन्बीनेशन घातक साबित हो सकता है। ऐसे में लोगों को ब्लड टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, शुगर, थाइराइड, केएफटी और सुबह के यूरिन की जांच के अलावा ईसीजी, ईको और ट्रेड मील टेस्ट जैसी जांच करवानी चाहिए।

ये हैं शुरुआती लक्षण

तेज चलने पर या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना, एसिडिटी बने रहना और जल्दी थकान हो जाना जैसे इशारे होते हैं। ऐसा महसूस होने पर तुरंत दिल की प्रारंभिक जांच करवानी चाहिए।

By upnews

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