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Lakhimpur Kheri Violence: लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्र को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के 279 दिन बाद जेल से रिहा कर दिया गया है। शुक्रवार को जेल अधीक्षक के पास केन्द्रीय राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के पुत्र आशीष मिश्र की रिहाई का आदेश पहुंचा। रिहाई का आदेश मिलने के बाद कोर्ट प्रशासन ने रिहाई की सभी औपचारिक खानापूर्ति की।

शुक्रवार की शाम को आशीष मिश्र को रिहा कर दिया गया। आशीष मिश्र को मीडिया कर्मियों से बचाते हुए जेल के पिछले दरवाजे से बाहर निकाला गया। आशीष मिश्रा यहां से सीधे अपने घर के लिए निकल गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक आशीष मिश्र को एक सप्ताह के अंदर यूपी छोड़ना होगा। जमानत के दौरान वह यूपी और दिल्ली में नहीं रह पाएंगे। बतादें कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आशीष की अंतरिम जमानत मंजूर की थी। अब तक मंत्री पुत्र आशीष करीब 279 दिनों से जेल में ही थे।

जमानत देते समय क्या बोला था सुप्रीम कोर्ट 

2021 में हुए लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को बुधवार सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें आठ सप्ताह की जमानत दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते वक्त कुछ शर्तें भी रखी थीं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ ने याचिका मंजूर करते हुए कहा था याचिकाकर्ता को निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार मुचलका जमा करने पर शुरुआत में आठ सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है। शीर्ष अदालत ने आशीष मिश्रा को इस शर्त पर अंतरिम जमानत दी कि वह दिल्ली और यूपी में नहीं रहेंगे। जमानत पर रिहा होने के एक हफ्ते बाद वह यूपी छोड़ देंगे। अदालत ने कहा कि आशीष को अपनी लोकेशन के बारे में कोर्ट और संबंधित पुलिस थाने को जानकारी देनी होगी। आशीष या उनके परिवार द्वारा गवाहों को प्रभावित करने और मुकदमे में देरी की कोशिश करने पर जमानत रद्द कर दी जाएगी।

14 आरोपियों पर अदालत में आरोप तय

तीन अक्तूबर 2021 को तिकुनिया में हुए कांड में आठ लोगों की मौत हुई थी। इनमें चार किसानों व एक पत्रकार की मौत के केस में 14 आरोपियों पर अदालत में आरोप तय हो चुके हैं। इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के पुत्र आशीष समेत 13 आरोपी इस समय जेल में हैं। एक आरोपी वीरेंद्र शुक्ला जमानत पर है। मंत्री पुत्र की जमानत की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल थी। अदालत ने पिछली सुनवाई के समय फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार की सुबह सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। इससे पहले पहली बार 15 फरवरी 2022 को हाईकोर्ट के आदेश पर वह जेल से जमानत पर छूटा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आशीष की जमानत खारिज कर उसे सरेंडर करने का आदेश दिया था।

पहले हाईकोर्ट ने दी थी सशर्त जमानत

पहले भी सशर्त थी जमानत, गवाहों पर हमला बना था मुद्दा मंत्री पुत्र आशीष मिश्र को पहले भी हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दी थी। पर विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद खीरी कांड के गवाहों पर हमले का मामला तूल पकड़ गया। सबसे पहले 11 मार्च 2022 को खीरी कांड के गवाह तिकुनिया निवासी दिलजोत सिंह ने मामला दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि वह गन्ने की ट्रॉली लेकर जा रहे थे। इस बीच भाजपा की जीत पर जश्न मना रहे लोगों ने उन पर हमला कर दिया और गवाही न देने को धमकाया।

11 अप्रैल 2022 को रामपुर के बिलासपुर में रहने वाले खीरी कांड के गवाह ने उस पर हमले का केस दर्ज कराया था। जून 2022 में इस कांड के गवाह और किसान नेता दिलबाग सिंह संधू ने गोला कोतवाली में खुद पर फायर होने का मुकदमा दर्ज कराया। गवाहों पर हमले का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया गया।

खीरी कांड में मंत्री पुत्र आशीष समेत 14 आरोपियों पर छह दिसंबर 2022 को आरोप तय कर दिए थे। इस केस के सभी आरोपियों के खिलाफ एसआईटी ने तीन जनवरी 2022 को ही सीजेएम कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। अब इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सुनील कुमार वर्मा कर रहे हैं। मंत्री पुत्र समेत 13 आरोपियों की डिस्चार्ज अर्जियों को एडीजे सुनील वर्मा ने पांच दिसंबर 2022 को खारिज कर दिया था।

408 दिन से सलाखों के पीछे आरोपी

खीरी कांड का मुख्य आरोपी मंत्री पुत्र आशीष मिश्र 9 अक्तूबर 2021 से अब तक अलग-अलग 408 दिनों से सलाखों के पीछे है। इस दौरान एक बार जेल में उसकी तबीयत भी बिगड़ गई थी। आशीष को डेंगू बुखार की शिकायत के चलत जिला अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ गया था। गिरफ्तारी के बाद से लगभग एक साल का वक्त जेल में बिता चुका है।

By upnews

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